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रविवार, 30 जनवरी 2011

आओ हिंदी अक्षरों की पहचान देखे :जो आज तक दुनिया में कोई नही जानता वो चीज आज आप जाने :चौधरी अक्षर ज्योतिष का : भाग {1 }

अ आ इ ई:ये नर योनी है :
उ ऊ ए ऐ :ये पित्रू योनी  है :
ओ ऑ अं अँ : ये देव  योनी है :
ये तोनो योनिया नर रूपा है :
इन में से {अ } ने तीनबार अवतार लिया है :
{१] {अ }भगवान श्री  व्रिह्म्मा जी :
{२}ऑ }भगवान श्री विष्णु जी :
{३] अं }भगवान श्री महेश जी :
क्यों कि ये तीनो एक ही रूप है
ऐसे तीन बार अवतार {ई } ने  लिया है :
{१} माता श्री स्वरसती जी :
{२} माता श्री लक्ष्मी  जी :
{३} माता श्री सक्ति   जी :
ये तोनो  मानव   रूपा है :
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बाकी की योनियो के  बारे में निचे पड़े :
अ ई ऊ ऐ :ये {4}प्रिकार होते योनियों के :
मानव में देखोगे तो भी चार प्रिकार होते है :
नारी चार प्रिकार की होती है :
<span>प्रित्रुओ </span>   में भी चार प्रिकार होते है :
देवो में देखो तो चार प्रकार होते है :
जानवरो में देखो तो भी चार होते है :
उधारन के तोर पर में एक जानवर के :
बारे में लिख  <span>रहा</span>  हु बाकी के अपने आप :
सेट कर लेना क्यों कि समझ दार को इशारा काफी है:
       अ             ई                     ऊ              ऐ              {अं }
{१]कुत्ता :{२}घोदुआ :{३}लकड़भग्गा :{४}भेडिया:
   { क }       { ख }              { ग }        { घ }........{.ड़ }.
     क ...........ख .............ग ..........घ ........ { ङ }
    च............ छ..............ज............ झ.........{ ञ }
   ट.............. ठ............. ड.............ढ.........{ ण }
   त............  थ............. द.............ध.........{.न }
  प.............  फ...........  ब........... .भ..........{म }
  य.............. र ............ ल ........ व    
  श............  ष .............स............श्र ...........{}           
  ह.............क्ष............. ज्ञ ..........  त्र............{{}
 ये चारो का रूप एक ही है:
जेसे जेसे अक्षर आगे बड़ते जाते है :
वेसे वेसे ही जहर बड़ता  जाता है :
ये सभी अक्षर अलग अलग योनियों के है ;
आप किस योनी में से आये है :
आप अपने नाम के अक्षर मिलाये :
और उस अक्षर कि योनी मिलाये :
आपका सुभाव जीस योनी से मिलता है :
मानो आप उन योनी में से आये है :
जब कोई जीव अच्छे काम करता है :
तो उसे मानव योनी मिलती है :
और जब मानव अच्छे कर्म करता है :
तो उसे देव योनी मिलती है :
जब देवलोक में देवताओ से भूल होती है :
तो उसे भी उसी प्रिकार की योनी मिलती है :
जिस प्रिकार की उस देव ने भूल की है :
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मक्खियों में देखो तो भी चार प्रिकार होते है :
     {१}                   {२}             {३}               {४]
{१}मक्खी : {२]मध् माखी  {३}:पहाडू माखी {४} ततैया :
    { क }              {ख }              {ग }                {घ }
ये चारो का रूप एक ही है:
जेसे जेसे अक्षर आगे बड़ते जाते है :
वेसे वेसे ही जहर बड़ता  जाता है
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
हमने सिर्फ उधारन लिखे बाकी आप अपने नाम के आधार पर सेट करले :
अगर अभी भी आपकी समझ में नही आरहा  तो हमे फोन कर के पूछ सकते है :
 हमारा नाम :जगदीश  भाई  चौधरी  :
फोन न .919904271497 है  
 चौधरी अक्षर ज्योतिष :

1 टिप्पणी:

बेनामी ने कहा…

Dear Mr. Chaudhry,
It is very interesting subject which you have choosen for your study.
Yes I am interested to learn it but I found it bit difficult.
I request you to make a ebook in doc or pdf mode with all your articles related to this.
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thanks.
Ganesh
gkindian@ymail.com