अ आ इ ई:ये नर योनी है :
उ ऊ ए ऐ :ये पित्रू योनी है :
ओ ऑ अं अँ : ये देव योनी है :
ये तोनो योनिया नर रूपा है :
इन में से {अ } ने तीनबार अवतार लिया है :
{१] {अ }भगवान श्री व्रिह्म्मा जी :
{२}ऑ }भगवान श्री विष्णु जी :
{३] अं }भगवान श्री महेश जी :
क्यों कि ये तीनो एक ही रूप है
ऐसे तीन बार अवतार {ई } ने लिया है :
{१} माता श्री स्वरसती जी :
{२} माता श्री लक्ष्मी जी :
{३} माता श्री सक्ति जी :
ये तोनो मानव रूपा है :
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
बाकी की योनियो के बारे में निचे पड़े :
अ ई ऊ ऐ :ये {4}प्रिकार होते योनियों के :
मानव में देखोगे तो भी चार प्रिकार होते है :
नारी चार प्रिकार की होती है :
<span>प्रित्रुओ </span> में भी चार प्रिकार होते है :
देवो में देखो तो चार प्रकार होते है :
जानवरो में देखो तो भी चार होते है :
उधारन के तोर पर में एक जानवर के :
बारे में लिख <span>रहा</span> हु बाकी के अपने आप :
सेट कर लेना क्यों कि समझ दार को इशारा काफी है:
अ ई ऊ ऐ {अं }
{१]कुत्ता :{२}घोदुआ :{३}लकड़भग्गा :{४}भेडिया:
{ क } { ख } { ग } { घ }........{.ड़ }.
क ...........ख .............ग ..........घ ........ { ङ }
च............ छ..............ज............ झ.........{ ञ }
ट.............. ठ............. ड.............ढ.........{ ण }
त............ थ............. द.............ध.........{.न }
प............. फ........... ब........... .भ..........{म }
य.............. र ............ ल ........ व
श............ ष .............स............श्र ...........{}
ह.............क्ष............. ज्ञ .......... त्र............{{}
ये चारो का रूप एक ही है:
जेसे जेसे अक्षर आगे बड़ते जाते है :
वेसे वेसे ही जहर बड़ता जाता है :
ये सभी अक्षर अलग अलग योनियों के है ;
आप किस योनी में से आये है :
आप अपने नाम के अक्षर मिलाये :
और उस अक्षर कि योनी मिलाये :
आपका सुभाव जीस योनी से मिलता है :
मानो आप उन योनी में से आये है :
जब कोई जीव अच्छे काम करता है :
तो उसे मानव योनी मिलती है :
और जब मानव अच्छे कर्म करता है :
तो उसे देव योनी मिलती है :
जब देवलोक में देवताओ से भूल होती है :
तो उसे भी उसी प्रिकार की योनी मिलती है :
जिस प्रिकार की उस देव ने भूल की है :
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
मक्खियों में देखो तो भी चार प्रिकार होते है :
{१} {२} {३} {४]
{१}मक्खी : {२]मध् माखी {३}:पहाडू माखी {४} ततैया :
{ क } {ख } {ग } {घ }
ये चारो का रूप एक ही है:
जेसे जेसे अक्षर आगे बड़ते जाते है :
वेसे वेसे ही जहर बड़ता जाता है
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
हमने सिर्फ उधारन लिखे बाकी आप अपने नाम के आधार पर सेट करले :
अगर अभी भी आपकी समझ में नही आरहा तो हमे फोन कर के पूछ सकते है :
हमारा नाम :जगदीश भाई चौधरी :
फोन न .919904271497 है
चौधरी अक्षर ज्योतिष :

उ ऊ ए ऐ :ये पित्रू योनी है :
ओ ऑ अं अँ : ये देव योनी है :
ये तोनो योनिया नर रूपा है :
इन में से {अ } ने तीनबार अवतार लिया है :
{१] {अ }भगवान श्री व्रिह्म्मा जी :
{२}ऑ }भगवान श्री विष्णु जी :
{३] अं }भगवान श्री महेश जी :
क्यों कि ये तीनो एक ही रूप है
ऐसे तीन बार अवतार {ई } ने लिया है :
{१} माता श्री स्वरसती जी :
{२} माता श्री लक्ष्मी जी :
{३} माता श्री सक्ति जी :
ये तोनो मानव रूपा है :
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बाकी की योनियो के बारे में निचे पड़े :
अ ई ऊ ऐ :ये {4}प्रिकार होते योनियों के :
मानव में देखोगे तो भी चार प्रिकार होते है :
नारी चार प्रिकार की होती है :
<span>प्रित्रुओ </span> में भी चार प्रिकार होते है :
देवो में देखो तो चार प्रकार होते है :
जानवरो में देखो तो भी चार होते है :
उधारन के तोर पर में एक जानवर के :
बारे में लिख <span>रहा</span> हु बाकी के अपने आप :
सेट कर लेना क्यों कि समझ दार को इशारा काफी है:
अ ई ऊ ऐ {अं }
{१]कुत्ता :{२}घोदुआ :{३}लकड़भग्गा :{४}भेडिया:
{ क } { ख } { ग } { घ }........{.ड़ }.
क ...........ख .............ग ..........घ ........ { ङ }
च............ छ..............ज............ झ.........{ ञ }
ट.............. ठ............. ड.............ढ.........{ ण }
त............ थ............. द.............ध.........{.न }
प............. फ........... ब........... .भ..........{म }
य.............. र ............ ल ........ व
श............ ष .............स............श्र ...........{}
ह.............क्ष............. ज्ञ .......... त्र............{{}
ये चारो का रूप एक ही है:
जेसे जेसे अक्षर आगे बड़ते जाते है :
वेसे वेसे ही जहर बड़ता जाता है :
ये सभी अक्षर अलग अलग योनियों के है ;
आप किस योनी में से आये है :
आप अपने नाम के अक्षर मिलाये :
और उस अक्षर कि योनी मिलाये :
आपका सुभाव जीस योनी से मिलता है :
मानो आप उन योनी में से आये है :
जब कोई जीव अच्छे काम करता है :
तो उसे मानव योनी मिलती है :
और जब मानव अच्छे कर्म करता है :
तो उसे देव योनी मिलती है :
जब देवलोक में देवताओ से भूल होती है :
तो उसे भी उसी प्रिकार की योनी मिलती है :
जिस प्रिकार की उस देव ने भूल की है :
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मक्खियों में देखो तो भी चार प्रिकार होते है :
{१} {२} {३} {४]
{१}मक्खी : {२]मध् माखी {३}:पहाडू माखी {४} ततैया :
{ क } {ख } {ग } {घ }
ये चारो का रूप एक ही है:
जेसे जेसे अक्षर आगे बड़ते जाते है :
वेसे वेसे ही जहर बड़ता जाता है
''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
हमने सिर्फ उधारन लिखे बाकी आप अपने नाम के आधार पर सेट करले :
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हमारा नाम :जगदीश भाई चौधरी :
फोन न .919904271497 है
चौधरी अक्षर ज्योतिष :
1 टिप्पणी:
Dear Mr. Chaudhry,
It is very interesting subject which you have choosen for your study.
Yes I am interested to learn it but I found it bit difficult.
I request you to make a ebook in doc or pdf mode with all your articles related to this.
Distribute it among your friends and ask them to forward it to others.
thanks.
Ganesh
gkindian@ymail.com
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