{अ } अक्षर के बारे में आज बताता हु : {अ} अक्षर ब्रह्माड का पहला अक्षर है :
और ये निराकार है ये हर अक्षर के अंदर है क्यों कि ये बिज है :
और अ >का जो सुर है वो कंठ का है अक्षर ज्योतिष में अक्षर के साथ साथ
सुर का भी सीखना जरूरी है :अ का योग बहुत महत पुण है : जेसे {अ } के बिना पढाई सुरु नही कि :जा सकती :
इसे ही {अ }के योग के बिना जिन्दगी सफल बन नही सकती :
और { अ }की साधना तो क्या साधना है : कोई इन्शान अगर {अ }की साधना :
को जीवन में एक बार करले उस इन्शान को किसीकी अराधना करने जरूरत
नही पड़ेगी :क्यों की {अ }ही भ्रम है
{ अ }योग { अ }साधना } करने से पहलें आप अपने गुरु की सलाह जरुर ले :
{{ ख़ास चेताबनी }
{हाथ जोडकर सभी से बिनती है }कि :अ इ उ ए अं =
{अ}का योग {अ }की साधना }>किसी भी पारवारिक इन्शान के लिए नही है :
जो ईशान ग्रिती में है और उस का कोई गुरु है और वो आप से
{अ }का योग या { अ }की साधना करने को कहते है तो आप खुद जान जाइए :
कि हमारे गुरु को अक्षर ज्ञान नही है :देखिये हर इन्शान को हर ज्ञान नही होता :
देखिये आकाश निचे और पाताल उपर {84 }लाख योनिया है और हर योनी का :
एक देवता है ये बात तो सभी महान पुरुष जानते है :}
और हर देवता के पास अपनी खुद की सक्तिया है }
बसे में आगे पारिबारिक लोगो के लिया भी लिखुगा :अ इ उ ए अं = ये बिज है :
इनकी साधना हर इन्शान के लिए नही है
अधिक जानकारी के लिए फोन करे न 919904271497 है
लेखक : जगदीश भाई चौधरी
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